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 अध्यक्ष संदेश

       

‘कृषि से कृषि व्यापार - ग्रामीण किसानों को आगे ले जाना’ के नारे के साथ द्वितीय कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन 18-20 मार्च, 2017 को सूरजकुंड, फरीदाबाद, हरियाणा में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन-2017 के दो विशिष्ट उद्देश्य रहेः हरियाणा को परिनगरीय कृषि/बागवानी/सम्बद्ध गतिविधियों में विशिष्टता दिलाने के लिए प्रोत्साहन तथा कृषि व्यापार और विपणन नेतृत्व पर विशेष ध्यान देना। इसके अतिरिक्त कुछ मुद्दों जैसे किसानों की आय दुगुनी करने, जलवायु अनुकूल खेती, सूक्ष्म सिंचाई, मिट्टी का स्वास्थ्य, जैविक खेती, जोखिम प्रबंधन, ए2 दुग्धोत्पादन/डेयरी पालन, मत्सय पालन, कृषि वानिकी, कृषि उत्पादों का विपणन व कृषि उद्योगों आदि पर विशेष बल दिया गया। इस प्रकार, इस शिखर सम्मेलन से हरियाणा में कृषि की जिस क्षमता का अब तक उपयोग नहीं हो पाया है उसका व्यापक उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया, ताकि त्वरित, समग्र और टिकाऊ विकास हो सके। इस कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन से किसानों को सम्मानित करने, उन्हें सुविधा प्रदान करने और उनकी प्रगति के मार्ग प्रशस्त हुए। एक लाख से अधिक किसानों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों व नीतिकारों ने इस बड़े आयोजन में भाग लिया और इस मंच पर दर्शायी गई खेती की नई-नई और आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। हमारे कुछ किसानों ने अपने खेतों में की गई नई-नई खोजों तथा कृषि में विविधीकरण के मामले में स्वयं को कृषि नेता सिद्ध किया है। उन्हें इस सम्मेलन में ‘खेती रत्न’ से सम्मानित किया गया और ृ1,00,000 का नकद पुरस्कार दिया गया। अपने संबंधित क्षेत्र में कृषि नेता होने के कारण उन्हें अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनना होगा। इस प्रकार के सम्मान से राज्य के अन्य किसान भी खेती संबंधी नई-नई खोजों के बारे में अपनी क्षमता को उजागर करने में प्रेरित होंगे। मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई कि किसान प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बागवानी, जैविक खेती, बाजार से जुड़ाव, प्रसंस्करण और भंडारण, डेयरी पालन, मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में उभरती हुई नई-नई चुनौतियों से निपटने के लिए नए विचारों और नई खोजों को करने में सक्षम है। किसानों ने अपने उत्पादों की ‘ब्रांडिंग’ आरंभ कर दी है। इससे किसानों के बीच अपने उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार संबंधी मांग और बौद्धिक संपदा संबंधी मुद्दों के प्रति बढ़ती हुई जागरूकता का पता चलता है। इसके अतिरिक्त किसानों द्वारा प्रस्तुत प्रर्दशनी से यह भी स्पष्ट था कि कृषि को ‘प्रौद्योगिकी संचालित’ बनाने की आवश्यकता है और वैज्ञानिकों को जल और पोषक तत्व के कारगर उपयोग से युक्त फसलों की ऐसी किस्में विकसित करनी होंगी जो जैविक खेती के लिए अनुकूल हों। डेयरी क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के मामले में गायों की देसी नस्लों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसे विशेष रूप से पंचगव्य उत्पादों पर केन्द्रित होना चाहिए, ताकि किसानों की आमदनी भी बढ़ सके। वास्तव में, कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन - 2017 कृषि को ग्रामीण युवाओं के लिए और अधिक आकर्षक व लाभदायक बनाने में सहायक सिद्ध हुआ। सरकार ने ‘कृषि में युवाओं के सशक्तीकरण’ पर विशेष बल दिया है जिससे न केवल कृषि में अधिक वृद्धि लाने में सहायता मिलेगी बल्कि कृषि और इससे सम्बंधित उद्यमों से अधिक आमदनी हो सकेगी। हरियाणा सरकार के प्रयास निश्चित रूप से ऐसा वातावरण निर्माण करने और बुनियादी ढांचा तैयार करने में सफल होगा जिसमें ‘उत्तम खेती मध्यम बान..’ कहावत को ध्यान में रख कर दोनों ही महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियां युवाओं के हाथों मे हो तथा राज्य और राष्ट्र, दोनों का कल्याण हो - यही कामना।

डॉ रमेश कुमार यादव

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आयोग की पंद्रहवीं बैठक आयोग कार्यालय, अनाज मंडी, सेक्टर 20, पंचकूला में आयोजित की गई।

हरियाणा की कृषि व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण नीति पर हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ बैठक 1 जून, 2017 को सम्मेलन हॉल, किसान भवन, सेक्टर -14, पंचकुला में 10:30 बजे आयोजित की जाएगी।

27 अप्रैल, 2017 को आयोजित “हरियाणा के परिनगरीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण” पर कार्यदल की बैठक हिसार में आयोजित की गई।

25 अप्रैल, 2017 को आयोजित "हरियाणा में दुधारू गोपशुओं और भैंसों से संबंधित पशु पोषण” पर कार्यदल की बैठक हिसार में आयोजित की गई।

22 अप्रैल, 2017 को "हरियाणा में कृषि विस्तार" पर कार्यदल की बैठक लुवास, हिसार में आयोजित की गई।




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